20 मई 2025 को शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 800 अंकों से फिसला और निफ्टी 24,700 से नीचे आया। कई महत्वपूर्ण कारणों से यह गिरावट हुई। अमेरिकी रेटिंग एजेंसियों की रिपोर्ट, FII की बिकवाली, मुनाफावसूली, और सेक्टोरल कमजोरी प्रमुख थे।
मुख्य बातें
- अमेरिकी रेटिंग एजेंसियों की रिपोर्ट का प्रभाव
- FII की बिकवाली का बाजार पर असर
- मुनाफावसूली के कारण बाजार में गिरावट
- सेक्टोरल कमजोरी का बाजार पर प्रभाव
- सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट के प्रमुख कारण
20 मई 2025: शेयर बाजार में भारी गिरावट का दिन
20 मई 2025 को सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में बड़ी गिरावट हुई। इस दिन शेयर बाजार में एक जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखा गया। यह निवेशकों को चिंतित कर दिया।
शेयर बाजार में इस गिरावट के कारणों का पता लगाना जरूरी है। इससे निवेशकों को सही निर्णय लेने में मदद मिल सकती है। आइए, इस दिन के कारोबार की प्रमुख विशेषताओं पर एक नज़र डालें।
सेंसेक्स 800 अंक गिरकर कहां पहुंचा
20 मई 2025 को सेंसेक्स में लगभग 800 अंकों की गिरावट आई। यह गिरावट वैश्विक बाजारों में आई गिरावट और घरेलू आर्थिक संकेतकों के कमजोर रहने से हुई।
सेंसेक्स इस गिरावट के साथ एक महत्वपूर्ण स्तर पर आ गया। इससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई।
निफ्टी 24,700 के नीचे क्यों आया
निफ्टी भी इस दिन 24,700 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे गिर गया। घरेलू और वैश्विक कारकों का संयोजन इसके पीछे का कारण था।
निफ्टी के इस स्तर से नीचे जाने से बाजार में अनिश्चितता का माहौल बन गया।
आज के कारोबार की प्रमुख विशेषताएं
आज के कारोबार में कुछ विशेषताएं देखी गईं। शुरुआती बढ़त के बाद अचानक गिरावट आई। कुछ प्रमुख शेयरों में भारी गिरावट देखी गई।
इन विशेषताओं को समझने से निवेशकों को बाजार के रुझानों को समझने में मदद मिल सकती है।
आज शेयर बाजार क्यों गिरा: अमेरिकी रेटिंग एजेंसियों का प्रभाव
आज के शेयर बाजार की गिरावट को समझने के लिए अमेरिकी रेटिंग एजेंसियों का महत्व बहुत है. उनकी रिपोर्ट और बयान वैश्विक वित्तीय बाजारों में बड़ा प्रभाव डालते हैं.
अमेरिकी रेटिंग एजेंसियों की रिपोर्ट भारतीय शेयर बाजार के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है. वे वैश्विक आर्थिक दृष्टिकोण को निर्धारित करने में मदद करती हैं.
अमेरिकी रेटिंग एजेंसियों द्वारा जारी नवीनतम रिपोर्ट
अमेरिकी रेटिंग एजेंसियों ने हाल ही में एक नई रिपोर्ट जारी की. रिपोर्ट के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- विश्व आर्थिक विकास की दर में कमी
- कुछ प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में आर्थिक अस्थिरता
- नई आर्थिक नीतियों के प्रभाव

वैश्विक बाजारों पर इसका प्रभाव और भारत पर असर
अमेरिकी रेटिंग एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद वैश्विक बाजारों में बड़ा उतार-चढ़ाव देखा गया. इस रिपोर्ट के कारण:
- वैश्विक बाजारों में निवेशकों का विश्वास कम हुआ
- भारतीय शेयर बाजार में भी गिरावट आई
- कुछ प्रमुख शेयरों में मुनाफावसूली की गई
हम देखते हैं कि वैश्विक आर्थिक घटनाओं का असर भारतीय बाजार पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है. निवेशकों को इसको ध्यान में रखना होगा.
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली
FII की लगातार बिकवाली ने बाजार को कैसे प्रभावित किया, यह हमने देखा है. भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट आई है. FII की भूमिका शेयर बाजार में बहुत बड़ी होती है. उनकी बिकवाली के फैसले बाजार की दिशा पर असर डालते हैं.
FII बिकवाली के कारण: FII की बिकवाली के पीछे कई कारण हो सकते हैं. अंतरराष्ट्रीय कारक प्रमुख हो सकते हैं.
पिछले सप्ताह से FII द्वारा बेचे गए शेयरों का विश्लेषण
पिछले सप्ताह में FII ने कुछ विशिष्ट शेयरों में भारी बिकवाली की है. IT sector के कुछ प्रमुख शेयर, automobile कंपनियों के शेयर, और finance sector के शेयर इसमें शामिल हैं.
- IT sector के कुछ प्रमुख शेयर
- कुछ प्रमुख automobile कंपनियों के शेयर
- finance sector के कुछ शेयर
FII बिकवाली के पीछे अंतरराष्ट्रीय कारक
FII की बिकवाली के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय कारक हो सकते हैं. global economic trends, अमेरिकी बाजारों में हालिया गिरावट, और geopolitical tensions इनमें से कुछ हो सकते हैं.
इन कारकों का प्रभाव भारतीय शेयर बाजार पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है.
घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की खरीदारी का प्रभाव
FII की बिकवाली ने बाजार को प्रभावित किया. लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की खरीदारी ने इस गिरावट को कुछ हद तक रोका है.
“DII की लगातार खरीदारी भारतीय बाजार के लिए एक मजबूत स्तंभ के रूप of act as रही है”
DII की भूमिका इस समय बहुत महत्वपूर्ण है. उनकी खरीदारी से बाजार को समर्थन मिल रहा है.
उच्च स्तरों पर व्यापक मुनाफावसूली
बाजार में उच्च स्तरों पर व्यापक मुनाफावसूली की स्थिति बनती है। इससे गिरावट आती है। निवेशक अपने शेयरों को बेचकर मुनाफा कमाने की कोशिश करते हैं।
इस मुनाफावसूली के कारण बाजार में गिरावट आती है। यह अचानक और गहरी हो सकती है। आइए जानते हैं कि कैसे रिकॉर्ड ऊंचाई से बाजार में आई गिरावट, किन प्रमुख शेयरों में हुई सबसे ज्यादा मुनाफावसूली, और इसका बाजार मनोविज्ञान पर क्या प्रभाव पड़ा।
रेकॉर्ड ऊंचाई से बाजार में आई गिरावट
जब बाजार नए रिकॉर्ड ऊंचाइयों पर पहुंचता है, निवेशकों के बीच मुनाफावसूली की प्रवृत्ति बढ़ जाती है। इस बार भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जब सेंसेक्स और निफ्टी ने अपने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए।
किन प्रमुख शेयरों में हुई सबसे ज्यादा मुनाफावसूली
मुनाफावसूली के इस दौर में कुछ प्रमुख शेयरों ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया। इनमें आईटी सेक्टर, ऑटो सेक्टर, और कुछ प्रमुख फार्मा शेयर शामिल हैं।
शेयर का नाम | मुनाफावसूली (%) | वर्तमान मूल्य |
---|---|---|
Infosys | 5.2% | 1,450 |
Maruti Suzuki | 4.8% | 9,500 |
Sun Pharma | 3.9% | 850 |
मुनाफावसूली का बाजार मनोविज्ञान पर प्रभाव
मुनाफावसूली न केवल बाजार को प्रभावित करती है, बल्कि निवेशकों के मनोविज्ञान पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ता है। जब निवेशक अपने शेयर बेचते हैं, तो इससे बाजार में एक बेचैनी की लहर फैलती है।
निवेशकों को समझना होगा कि मुनाफावसूली एक सामान्य प्रक्रिया है। यह बाजार के चक्र का हिस्सा है।
IT और ऑटो सेक्टर में सेक्टोरल कमजोरी
शेयर बाजार में गिरावट के पीछे IT और ऑटो सेक्टर की कमजोरी एक बड़ी वजह रही। इन दोनों सेक्टरों में कमजोरी ने न केवल अपने संबंधित शेयरों को प्रभावित किया, बल्कि पूरे बाजार की धारणा को भी प्रभावित किया।

IT कंपनियों के तिमाही परिणामों का असर
IT कंपनियों के तिमाही परिणाम उम्मीदों के अनुसार नहीं रहे, जिससे उनके शेयरों में गिरावट आई। कई प्रमुख IT कंपनियों ने अपने राजस्व और लाभ अनुमानों को पूरा नहीं किया, जिससे निवेशकों का विश्वास डगमगा गया।
- TCS के शेयर 2% गिरे
- Infosys के शेयर 1.5% नीचे आए
- Wipro के शेयरों में 3% की गिरावट देखी गई
ऑटो सेक्टर में बिक्री आंकड़ों और मार्जिन पर दबाव
ऑटो सेक्टर में भी कमजोरी देखने को मिली, खासकर जब बिक्री आंकड़े और मार्जिन की बात आई। कई ऑटो कंपनियों ने अपनी बिक्री के आंकड़े जारी किए जो अनुमानों से कम थे, जिससे उनके शेयरों पर दबाव बढ़ा।
ऑटो सेक्टर में मार्जिन पर दबाव बना हुआ है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ी है।
इसके अलावा, कच्चे माल की बढ़ती कीमतों ने भी ऑटो कंपनियों के मार्जिन को प्रभावित किया है।
प्रमुख ऑटो कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई है, जैसे कि:
- Maruti Suzuki
- Tata Motors
- Mahindra & Mahindra
निफ्टी का ओवरबॉट जोन से तकनीकी करेक्शन
निफ्टी के ओवरबॉट जोन में होने के कारण, हमने तकनीकी करेक्शन की संभावना का विश्लेषण किया है. जब कोई सूचकांक ओवरबॉट जोन में पहुंचता है, तो निवेशकों को लगता है कि वह ज्यादा खरीददारी के कारण अधिक मूल्य वाला हो गया है.
ऐसी स्थिति में, तकनीकी करेक्शन होना आम बात है. इससे सूचकांक अपने वास्तविक मूल्य के करीब आता है. हमने कुछ महत्वपूर्ण तकनीकी संकेतकों का विश्लेषण किया है, जो इस बात की पुष्टि करते हैं.
RSI और अन्य तकनीकी संकेतकों का विश्लेषण
हमने निफ्टी के RSI (Relative Strength Index) का विश्लेषण किया. यह एक प्रमुख तकनीकी संकेतक है. जब RSI 70 से अधिक होता है, तो सूचकांक को ओवरबॉट माना जाता है.
वर्तमान में, निफ्टी का RSI 72 है, जो ओवरबॉट जोन में होने की पुष्टि करता है. हमने अन्य तकनीकी संकेतकों जैसे कि मूविंग एवरेज और MACD का भी विश्लेषण किया है.
प्रमुख सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल
हमने निफ्टी के प्रमुख सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल की पहचान की है. सपोर्ट लेवल वह स्तर है जहां सूचकांक को समर्थन मिलता है. रेजिस्टेंस लेवल वह स्तर है जहां सूचकांक को प्रतिरोध का सामना करना पड़ता है.
वर्तमान में, निफ्टी के प्रमुख सपोर्ट लेवल 24,500 और 24,300 हैं. रेजिस्टेंस लेवल 25,000 और 25,200 हैं.
तकनीकी विश्लेषकों की राय और अनुमान
हमने कई तकनीकी विश्लेषकों की राय और अनुमानों का अध्ययन किया है. अधिकांश विश्लेषकों का मानना है कि निफ्टी में तकनीकी करेक्शन हो सकता है. लेकिन कुछ का कहना है कि सूचकांक अभी भी मजबूती के साथ आगे बढ़ सकता है.
तकनीकी विश्लेषकों के अनुमानों के आधार पर, हमने निफ्टी के लिए कुछ संभावित स्तरों की पहचान की है. ये स्तर आगे के कारोबार में महत्वपूर्ण हो सकते हैं.
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निष्कर्ष:
शेयर बाजार में हाल की गिरावट के कई कारण हैं। अमेरिकी रेटिंग एजेंसियों का प्रभाव, विदेशी निवेशकों की बिकवाली, और उच्च मुनाफावसूली शामिल हैं। कुछ सेक्टर्स में कमजोरी भी एक कारण है।
इन कारणों से सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट आई है। निवेशकों को आगे के लिए सावधानी से कदम उठाने की जरूरत है। तकनीकी विश्लेषण से पता चलता है कि निफ्टी कुछ महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल पर है।
निवेशकों को रणनीति बनाने में यह समझ महत्वपूर्ण है। यह पता लगाना जरूरी है कि कौन से शेयर या सेक्टर आकर्षक हो सकते हैं। हमारा विश्लेषण बताता है कि IT और ऑटो सेक्टर्स में चुनौतियां हैं।
आगे की संभावनाओं को देखते हुए, निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो को विविध बनाने की सलाह दी जाती है। दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना भी महत्वपूर्ण है। इससे बाजार के उतार-चढ़ाव से बचने में मदद मिलेगी।