अमेरिका ने हाल ही में भारत, चीन और कई अन्य देशों से आयातित सामानों पर 50% तक टैरिफ (आयात शुल्क) बढ़ा दिया है। इसका मकसद अमेरिकी उद्योगों को सुरक्षा देना है, लेकिन इसका सीधा अमेरिकी उपभोक्ताओं पर टैरिफ का असर पड़ रहा है। येल यूनिवर्सिटी के बजट लैब की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में औसत टैरिफ दर 18.3% हो गई है, जो 1909 के बाद सबसे ज्यादा है। इससे अमेरिकी परिवारों को प्रति वर्ष औसतन $2,400 (लगभग 2 लाख रुपये) का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है।

1. अमेरिकी उपभोक्ताओं पर टैरिफ का असर – महंगाई बढ़ेगी
टैरिफ बढ़ने का सबसे बड़ा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है। अब अमेरिकी नागरिकों को विदेशी सामान खरीदने के लिए अधिक पैसा देना होगा।
किन चीजों के दाम बढ़ेंगे?
- इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू उपकरण: फ्रिज, वॉशिंग मशीन, एयर कंडीशनर जैसे उत्पादों में स्टील और एल्युमीनियम का इस्तेमाल होता है, जिन पर टैरिफ बढ़ा है। कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्री वेंडोंग झांग का कहना है कि इनकी कीमतें जल्द ही बढ़ेंगी।
- खाद्य पदार्थ: अमेरिका में केला, कॉफी, मछली, बीयर और शराब जैसी चीजें ज्यादातर आयात की जाती हैं। इन पर भी महंगाई का असर पड़ेगा।
- ऑटोमोबाइल: चीन से आयातित कार पार्ट्स महंगे होंगे, जिससे कारों की कीमतें बढ़ सकती हैं।
अमेरिकी परिवारों पर कितना बोझ पड़ेगा?
- टैक्स फाउंडेशन के अनुसार, एक औसत अमेरिकी परिवार को सालाना $2,400 अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है।
- पहले जो सामान $100 में मिलता था, अब वह $118.3 में मिलेगा।
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2. अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर टैरिफ का प्रभाव – GDP गिर सकती है
टैरिफ बढ़ने से अमेरिका की आर्थिक विकास दर (GDP) पर भी असर पड़ेगा। बजट लैब का अनुमान है कि:
- अमेरिका की GDP 0.5% तक गिर सकती है, जो $140 बिलियन (11.6 लाख करोड़ रुपये) के नुकसान के बराबर है।
- निवेश कम होगा, क्योंकि कंपनियों को उत्पादन लागत बढ़ जाएगी।
- निर्यात घटेगा, क्योंकि अन्य देश भी जवाबी टैरिफ लगा सकते हैं।
नौकरियों पर संकट – 2010 के बाद सबसे खराब हालात
टैरिफ बढ़ने से अमेरिका में रोजगार दर भी प्रभावित हुई है। जुलाई 2024 में:
- सिर्फ 73,000 नई नौकरियां सृजित हुईं, जबकि सरकार को 1.09 लाख की उम्मीद थी।
- मई और जून में भी नौकरियों में गिरावट देखी गई।
- पिछली तिमाही में महज 35,000 नौकरियां प्रति माह बढ़ीं, जो 2010 के बाद का सबसे खराब आंकड़ा है।
इससे नाराज होकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स की कमिश्नर एरिका मैकएंटरफर को हटा दिया, यह आरोप लगाते हुए कि रिपोर्ट में “राजनीतिक हेराफेरी” की गई थी।

3. क्या ट्रेड वॉर की आशंका बढ़ रही है?
जब अमेरिका टैरिफ बढ़ाता है, तो अन्य देश जवाबी टैरिफ लगाकर जवाब देते हैं। 2018-19 के चीन-अमेरिका ट्रेड वॉर का उदाहरण देखें:
- ट्रम्प ने चीन पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया था।
- चीन ने जवाब में अमेरिकी सोयाबीन, ऑटोमोबाइल्स और अन्य उत्पादों पर टैक्स बढ़ा दिया।
- सोयाबीन की कीमत 25% बढ़ गई, और निर्यात में 50% गिरावट आई।
- अमेरिकी सरकार को $7.3 बिलियन का राहत पैकेज किसानों को देना पड़ा।
क्या भारत और यूरोप भी जवाबी टैरिफ लगाएंगे?
- भारत ने पहले ही अमेरिकी सेब, अखरोट और दवाओं पर जवाबी टैरिफ लगाया है।
- यूरोपीय संघ भी अमेरिकी मोटरसाइकिल, जींस और विस्की पर टैरिफ बढ़ा सकता है।
अगर ट्रेड वॉर बढ़ता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होगा।
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4. क्या ट्रम्प की टैरिफ नीति अमेरिका के लिए फायदेमंद होगी?
ट्रम्प का दावा है कि टैरिफ बढ़ाने से अमेरिकी उद्योग मजबूत होंगे और रोजगार बढ़ेगा। लेकिन अर्थशास्त्रियों का मानना है कि:
- महंगाई बढ़ेगी, जिससे उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति कम होगी।
- निर्यात घटेगा, क्योंकि अन्य देश भी अमेरिकी सामानों पर टैरिफ लगाएंगे।
- निवेशकों का भरोसा कम होगा, जिससे शेयर बाजार प्रभावित हो सकता है।
क्या 79 वर्षीय ट्रम्प अपने ही देश का नुकसान करेंगे?
ट्रम्प का मानना है कि अल्पकालिक नुकसान के बाद अमेरिका को लंबे समय में फायदा होगा। लेकिन अगर महंगाई और बेरोजगारी बढ़ती रही, तो 2024 के चुनाव में यह नीति उनके लिए नुकसानदायक हो सकती है।

निष्कर्ष: क्या अमेरिका को टैरिफ बढ़ाना चाहिए?
टैरिफ बढ़ाने का फायदा यह है कि अमेरिकी कंपनियों को स्थानीय बाजार में सुरक्षा मिलेगी। लेकिन नुकसान यह है कि:
- महंगाई बढ़ेगी, जिससे आम लोग प्रभावित होंगे।
- नौकरियां कम होंगी, क्योंकि कंपनियों की लागत बढ़ेगी।
- ट्रेड वॉर का खतरा बढ़ेगा, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा।
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