अमेरिका ने भारतीय आमों के 15 जहाज क्यों लौटाए? पूरी जानकारी | US FDA Rejects Indian Mangoes

अमेरिका ने भारतीय आमों के 15 जहाज क्यों लौटाए

आज का खर्चा-पानी: अरे भई, सुनो जरा! अमेरिका ने तो हमारे मालदार आमों से लदे 15 जहाज ही वापस भेज दिए! ये क्या माजरा है? क्या सच में अमेरिका हमारे जाने-माने ‘आम’ के साथ भेदभाव कर रहा है? चलिए, आज हम इस पूरे मामले की तह तक जाते हैं और समझते हैं कि आखिर हुआ क्या है…

क्या हुआ पूरा मामला?

अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने हाल ही में भारत से आए आमों के 15 शिपमेंट वापस लौटा दिए। ये सारे जहाज फ्लोरिडा के एक बंदरगाह पर रोक लिए गए थे। अब सवाल ये उठता है कि आखिर हमारे ‘आम’ में ऐसा क्या खराबी निकल आई जो अमेरिका ने इन्हें मना कर दिया?

अमेरिका ने भारतीय आमों के 15 जहाज क्यों लौटाए: असली वजह क्या है?

  1. कीटनाशक का मुद्दा: अमेरिका का कहना है कि इन आमों में मेथिल ब्रोमाइड नामक कीटनाशक के अंश पाए गए हैं, जो उनके मानकों से ऊपर थे।
  2. इर्रिडिएशन प्रक्रिया की कमी: अमेरिका में फलों को निर्यात करने से पहले ‘इर्रिडिएशन’ नामक प्रक्रिया से गुजरना जरूरी होता है, जिसमें फलों को कीटाणुमुक्त किया जाता है। भारत के कुछ निर्यातक इस प्रक्रिया को ठीक से नहीं कर पाए।
  3. सैनिटरी सर्टिफिकेट की कमी: कुछ शिपमेंट में जरूरी दस्तावेजों की कमी भी पाई गई।
गैर-टैरिफ बैरियर' (Non-Tariff Barrier)

भारत के लिए ये क्यों बड़ी बात है?

  • भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है, जो हर साल अमेरिका को करीब 50 मिलियन डॉलर (लगभग 400 करोड़ रुपये) के आम निर्यात करता है।
  • इससे न सिर्फ हमारे किसानों को नुकसान होगा, बल्कि भारत के ‘फल निर्यातकों’ की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ सकते हैं।
  • पिछले कुछ सालों में ऐसा पहली बार हुआ है जब इतने बड़े पैमाने पर भारतीय आमों को रिजेक्ट किया गया है।

क्या ये सच में ‘साजिश’ है?

कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये अमेरिका की तरफ से भारतीय फलों के खिलाफ एक तरह की ‘गैर-टैरिफ बैरियर’ (Non-Tariff Barrier) हो सकती है, जिससे वो अपने घरेलू बाजार को भारतीय आमों से बचाना चाहते हैं। वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि ये सिर्फ क्वालिटी कंट्रोल का मामला है और भारत को अपने निर्यात मानकों को और सख्त करना चाहिए।

अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA)

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क्या होगा अब?

  • भारत सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और अमेरिकी FDA से बातचीत शुरू कर दी है।
  • निर्यातकों को अब सख्त गुणवत्ता जांच और इर्रिडिएशन प्रक्रिया का पालन करना होगा।
  • अगर जल्द हालात नहीं सुधरे, तो भारत को अपने आमों के लिए नए बाजार (जैसे यूरोप, मिडिल ईस्ट) तलाशने होंगे।

आखिरी बात:

अमेरिका ने भारतीय आमों के 15 जहाज क्यों लौटाए, अमेरिका का ये कदम भारतीय किसानों और निर्यातकों के लिए एक बड़ा झटका है। लेकिन अगर हम अपने मानकों को सुधार लें, तो ये मुश्किल भी एक अवसर में बदल सकती है। वैसे भी, हमारे आमों का स्वाद तो दुनिया भर में मशहूर है—क्या अमेरिका वाले इतनी आसानी से इसका मजा छोड़ देंगे? 😉

आपकी राय? क्या आपको लगता है कि ये सिर्फ क्वालिटी इश्यू है या फिर अमेरिका की कोई साजिश? कमेंट में बताइए!


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